पांच नगर – प्रतीक

(1)

दिल्ली-
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कच्चे रंगों में नफ़ीस

चित्रकारी की हुई , कागज की एक डिबिया

जिसमें नकली हीरे की अँगूठी

असली दामों के कैशमेमो में लिपटी हुई रखी है ।

(2)
लखनऊ-
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श्रृंगारदान में पड़ी

एक पुरानी खाली इत्र की शीशी

जिसमें अब महज उसकी कार्क पड़ी सड़ रही है ।

(3)

बनारस-
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बहुत पुराने तागे में बंधी एक ताबीज़,

जो एक तरफ़ से खोलकर

भाँग रखने की डिबिया बना ली गयी है ।

(4)
इलाहाबाद-
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एक छूछी गंगाजली

जो दिन-भर दोस्तों के नाम पर

और रात में कला के नाम पर

उठायी जाती है ।

(5)

बस्ती-
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गांव के मेले में किसी

पनवाड़ी की दुकान का शीशा

जिस पर अब इतनी धूल जम गयी है

कि अब कोई भी अक्स दिखाई नहीं देता । ~सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

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