बोल के लब आजाद हैं तेरे, बोल के जुबाँ अब तक जिन्दा है… by Ravinder Singh Dhull

बोल के लब आजाद हैं तेरे,
बोल के जुबाँ अब तक जिन्दा है…

आजादी को आये आधी सदी से अधिक हो गया. इस समय के समाप्त होने के बाद फैज़ के उस शेर को याद कर रहा हूँ जो आज कल बहुत ट्रेंड में है..ख़ास बात होती है किसी भी सरकार की; उस सरकार के साथ और विरोध में तरह तरह के कसीदे गिने जाते हैं…इस सरकार में भी कुछ अलग नहीं…यहाँ भी यही हाल है…इसके पक्ष और विरोध में कसीदे गिने जाते हैं..अब ऊपर शेर को देख लीजिये…फैज़ आजादी से पहले के शायर रहे और उन कुछ शायरों में से थे जो आजादी के बाद के वीभत्स नरसंहार से दुखी रहे…यह शेर उस ही समय का लिखा गया होगा जब बोलने की आजादी नही थी…आप बोलिए और अंग्रेजी सरकार आपको पकड़ कर अंदर कर देती थी…कभी देश द्रोह तो कभी सुरक्षा के नाम पर आपको कभी बोलने नहीं दिया जाता था…आज यह शेर दोबारा जिन्दा हो गया है….बोलना अब दूभर हो चला है; बोलने पर तरह तरह की गालियों तक तो ठीक था पर महाराष्ट्र जैसी जगहों पर राष्ट्रद्रोह के मुकद्दमें दर्ज होने की बातें आ रही हैं…यह भारत की स्व्शुद्ध देसी आंग्ल सरकार है….

आंग्ल सरकार? अब इस बात से बड़ी आपत्ति होगी बहुत लोगों को…अब राष्ट्रभक्तों की सरकार को आंग्ल सरकार कह दिया तो आपत्ति तो होनी तय है…भाई जीने की आजादी तब भी थी, लाखों के टेक्स तब भी लगते थे, लोगों को तब भी पीटा जाता था, राष्ट्रद्रोह के झूठे मुकद्दमें तब भी दर्ज होते थे….बोलते ही अंदर कर दिया जाता था….

इस सरकार में इससे अलग कुछ होता हो तो बताइए….गाली मिलेंगी अलग और अंदर करेंगे अलग….

आज शहीदेआज़म भगत सिंह का जन्मदिन है…सुबह से उनके फोटो शेयर हो रहे हैं; शेयर करने वाले वे भी हैं जो सरकार के साथ हैं और वे भी जो सरकार के विरुद्ध हैं…उन सब के लिए मैं कहना चाहूँगा कि भगत सिंह के जन्मदिन को मनाने का झूठा पाखण्ड न करें; ऐसे देश की कल्पना नहीं की थी उन्होंने या चंद्रशेखर आजाद ने. वे आजाद रहे और आजादी के लिए शहीद हुए…भूल जाइए आप आजाद हैं….या आजाद देश के नागरिक हैं…पहले विदेशी शासन करते थे अब देशी करते हैं…शासन के साथ विशुद्ध देशी गालियाँ मिलती हैं अलग…

शहीदे आजम आपके जन्मदिन पर मैं आपको श्रद्धांजलि देने की योग्यता नहीं रखता क्योंकि मैं इस गुलाम देश में जी रहा हूँ और अब तक इसे आजाद नहीं करवा पाया हूँ पर यह संकल्प जरूर लेता हूँ कि जीवित रहने तक आजाद रहूँगा और अपने प्रयास जारी रखूंगा..भले अंजाम कुछ भी हो.

जय हिन्द

By

Ravinder Singh Dhull

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